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दोस्तों, सुबह उठने के बाद आप सबसे पहले क्या चीज़ करते हैं? सोचिए। आप अपना फोन चैक करते हैं और सोने से पहले आप आखिरी चीज़ क्या करते हैं? आप अपना फोन चैक करते हैं।
आज हम बात करेंगे अपनी जिंदगी की सबसे जरूरी चीज की। यहां मैं फोन की बात नहीं कर रहा हूं। यहां मैं बात कर रहा हूं आपके टाइम की—आपके स्क्रीन टाइम की, जो सोशल मीडिया के कारण तेजी से बर्बाद हो रहा है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब, फेसबुक, वाट्सएप, स्नैपचैट—जिनसे आपको फायदा मिलना चाहिए था, असल में वही चीज आपको जीवन में नुकसान पहुंचा रही है।
शायद आप अभी सोच रहे होंगे कि यह वीडियो भी तो हम सोशल मीडिया के थ्रू ही देख रहे हैं। लेकिन आपको यह बात भी समझनी चाहिए कि हर चीज़ अच्छी भी होती है और बुरी भी, लेकिन सिर्फ एक लिमिट तक। अगर कोई चीज़ एक लिमिट से ज्यादा हो जाए तो वह एडिक्शन बन जाती है। इसलिए आज के वीडियो में जानेंगे सोशल मीडिया के इस चक्रव्यूह के बारे में, जिसमें घुसना तो बेहद आसान है लेकिन निकलना बहुत ही मुश्किल है।
ऑन एवरेज, हर इंसान हर दिन तकरीबन 150 बार अपने फोन को अनलॉक करता है। इंडिया में आज एवरेज स्क्रीन टाइम सात घंटे का है। यानी कि हर व्यक्ति तकरीबन सात घंटे मोबाइल पर बिता रहा है। इनमें करीब तीन घंटे मूवीज़ और वीडियोज़ देखने में निकल जाते हैं और करीब पौने दो घंटे वीडियो गेम खेलने में बर्बाद हो रहे हैं। आजकल की सुपरफास्ट जेनरेशन, जिन्हें जिन Z बोलते हैं, उनका स्क्रीन टाइम लगभग नौ घंटे का है। यानी आज का युवा अपना कीमती समय नौ घंटे सोशल मीडिया पर बिता रहा है। हालत तो ये है कि लोग स्टेटस लगाते हैं, फिर बार-बार चैक करते हैं कि जिसके लिए लगाया था, उसने स्टेटस देखा है या नहीं।
यूट्यूब, इंस्टा, नेटफ्लिक्स, फेसबुक के इस दौर में मैक्सिमम स्क्रीन टाइम स्क्रॉलिंग में बीत जाता है। एक रील के बाद दूसरी रील, दूसरी रील के बाद तीसरी, चौथी, पांचवी—कब घंटों यूं ही निकल जाते हैं, पता ही नहीं चलता। इसी को एडिक्शन बोलते हैं। इससे आपकी बाकी जिंदगी और दिमाग पर बहुत गहरा असर पड़ता है। और अगर कोई किसी का फोन कुछ समय के लिए ले लेता है, तो उसकी हालत बेहद खराब होने लगती है।
सोशल मीडिया का एडिक्शन ठीक वैसा ही है जैसे कि ड्रग या जुए की होती है। जिसको ड्रग की लत एक बार लग गई, अब उसको ड्रग चाहिए ही चाहिए। और जिसे जुए की लत एक बार लग गई, वो इंसान अगर बार-बार हारता भी रहे, तब भी खेलता रहता है। इसी तरह, सोशल मीडिया और Screen Time का एडिक्शन भी इससे कम नहीं है। सुनने में अजीब लग रहा होगा, लेकिन यही हकीकत है। चाहे रात को 2 बजे आंख खुल जाए, लोग लग जाते हैं फोन चैक करने। जाने-अनजाने में आज की जेनरेशन को सोशल मीडिया की लत लग चुकी है, और कोई भी लत अच्छी नहीं होती।
जानते हैं पहले सोशल मीडिया एडिक्शन काम कैसे करती है? फिर इसके सॉल्यूशन के बारे में जानेंगे।
कोई भी एडिक्शन आखिर लगती क्यों है?
आसान पहुंच ही सबसे बड़ा कारण

Take Control of Your Screen Time
इसका सबसे पहला कारण है कि जो चीज़ आसानी से उपलब्ध होती है, उसकी लत भी जल्दी लग जाती है। सोशल मीडिया पर जाना बहुत आसान है। आपको करना क्या है? बस फोन उठाना, ऐप ओपन करना और आप सोशल मीडिया की दुनिया में पहुंच जाते हैं। यह प्रक्रिया इतनी सरल और तेज़ है कि लोग बार-बार बिना सोचे-समझे इसे इस्तेमाल करने लगते हैं, जिससे धीरे-धीरे यह आदत लत में बदल जाती है।
स्पीड रिवॉर्ड का प्रभाव

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बुरी चीजों की लत हमेशा जल्दी लगती है, जबकि अच्छी आदतें अपनाने में समय लगता है। उदाहरण के लिए, शराब पीने की लत तेजी से लग जाती है, जबकि किताब पढ़ने की लत शायद ही कभी लगती है। इसका कारण है स्पीड रिवॉर्ड। यह वही सिद्धांत है, जिसमें किसी गतिविधि का परिणाम तुरंत मिलता है, जिससे मस्तिष्क उसे दोहराने के लिए प्रेरित होता है।
जब कोई शराब पीता है, तो महज 20-25 मिनट में उसका असर दिखने लगता है—यानी एक्शन का रिएक्शन तुरंत मिलता है। यही कारण है कि लोग इसे बार-बार करने के लिए आकर्षित होते हैं। अब सोचिए, अगर शराब पीने से कोई नशा ही न हो, तो लोग इसे पीना छोड़ सकते हैं, क्योंकि एक्शन तो लिया गया, लेकिन कोई रिवॉर्ड नहीं मिला। इसी सिद्धांत पर सोशल मीडिया भी काम करता है—आप कोई पोस्ट डालते हैं या स्क्रॉल करते हैं, और तुरंत लाइक्स, कमेंट्स और नोटिफिकेशन मिलने लगते हैं। यह त्वरित संतुष्टि की भावना लाता है, जो लोगों को बार-बार इसकी ओर खींचती है, और धीरे-धीरे यह लत में बदल जाता है।
कनेक्शन या एडिक्शन?

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सोशल मीडिया आज हमारे जीवन का सबसे बड़ा एडिक्शन बन चुका है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। हालांकि, इसे पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, क्योंकि सोशल मीडिया के कारण कई लोगों की शादियां हुई हैं, नए रिश्ते बने हैं, और दूर के लोग करीब आए हैं। लेकिन क्या वास्तव में यही सोशल मीडिया का मूल उद्देश्य है?
प्रसिद्ध इतिहासकार युवाल नोआ हरारी ने एक बार मार्क जकरबर्ग से एक महत्वपूर्ण सवाल पूछा—”क्या फेसबुक का काम केवल दो लोगों को मिलवाना है या उन दो लोगों को फेसबुक पर बनाए रखना है?” उन्होंने आगे पूछा, “आप क्या चाहेंगे—फेसबुक पर मिले दो दोस्त बाहर फुटबॉल खेलने चले जाएं या फेसबुक पर ही बने रहें?”
इस सवाल से एक गहरी सच्चाई सामने आती है—क्या सोशल मीडिया का असली उद्देश्य लोगों को जोड़ना है, या उन्हें अधिक से अधिक समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखना? क्या टेक कंपनियां चाहती हैं कि लोग सोशल मीडिया पर कम समय बिताएं और असल जिंदगी में ज्यादा इंटरैक्ट करें? या वे चाहती हैं कि हम स्क्रीन से चिपके रहें? यही वह सवाल है, जिस पर हमें विचार करने की जरूरत है।
दोस्तों, फेसबुक के आप अपने दोस्तों से पर्सनली कितना मिलते हैं, यह बहुत बड़ा सवाल है। क्या फेसबुक यही चाहता है कि आप फेसबुक पर ही रहें और ज्यादा टाइम यहीं बिताएं। इसके सॉल्यूशन की बात करेंगे, लेकिन पहले हमें प्रॉब्लम को पूरी तरह से समझना जरूरी है। तभी आप सॉल्यूशन पर भी काम कर पाएंगे।
अब बात करते हैं सोशल मीडिया से होने वाले दो बड़े नुकसान की। पहला वेस्ट ऑफ वैल्यूएबल टाइम। अगर आपका स्क्रीन टाइम 7 से 8 घंटे का है तो आप अपनी जिंदगी के एक तिहाई यानी 33 परसेंट वक्त अपने मोबाइल पर गुजार रहे हैं। जो कि मेरे हिसाब से बहुत ज्यादा है। ज्यादा से ज्यादा दो घंटे का होना चाहिए, उससे ज्यादा नहीं।
सोशल मीडिया यूज करने का सबसे बड़ा नुकसान सोशल मीडिया पर खासकर इंस्टा पर पीपल लुक लाइक दै हेव मच बेटर लाइफ। इंस्टा पर लोग ऐसा फोटो और ऐसे रील डालते हैं, जिसे देखकर लगता है कि ये कितने खुश हैं। अक्सर पिक्चर मोडीफाई करके फिल्टर लगाकर डाली जाती हैं। बहुत सारी पिक्चर्स पहले क्लिक की जाती हैं। फिर उनमें से सिलेक्ट की जाती है कि सबसे बेस्ट एंगल और सबसे बेस्ट लाइट किस फोटो में आ रही है। कौन सी फोटो सबसे अच्छी दिख रही है और फिर वही फोटो अपलोड की जाती है। जितने वह रियल जिंदगी में खुश होते हैं। वह उससे कई ज्यादा खूबसूरत और स्मार्ट दिख रहे होते हैं। देखने वाले को लगता है कि कितने स्मार्ट और खुश और बढ़िया लोग हैं। ये दुनिया कितनी खुश है, कहां कहां घूमने जा रही है, पार्टीज हो रही है और मेरी जिंदगी में कितने दुख हैं। गमों से भरी है मेरी जिंदगी। और यहीं से शुरू होता है, इनफिनिटी कॉम्प्लेक्स और कम्पैरिजन।
ऐसे में फिर कुछ लोगों को लगता है कि हम कितने निचले स्तर पर अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं। जितने लोग इंस्टा पर खुश दिखते हैं, हो सकता है वह अंदर से उतने ही दुखी हों क्योंकि आप कोई भी क्यों ना हो हमेशा ही खुश और सुंदर नहीं दिख सकते। सभी की जिंदगी में दिक्कतें होती हैं लेकिन कोई भी अपनी प्रॉब्लम्स को सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं करता। सो डू नॉट कंपेयर योर एक्चुअल लाइक टू एनिवन एल्स सोशल मीडिया लाइफ यानी अपनी जिंदगी को किसी भी सोशल मीडिया में दिखने वाली जिंदगी से कंपेयर न करें और कई बार सोशल मीडिया पर जाकर ऐसा लगता है कि दुनिया में दुख है ही नहीं। सब जगह सिर्फ खुशियां ही खुशियां हैं।
अब हमने अच्छे से समझ लिया है कि प्रॉब्लम क्या है।
अब हम बात करेंगे पाँच टिप्स की जो आपको सोशल मीडिया के एडिक्शन छुड़वाने में आपकी मदद करेंगे। आपको इस एडिक्शन से बाहर निकलना ही होगा नहीं तो आगे चलकर अंजाम बहुत बुरा होने वाला है। और ये पाँच टिप्स अगर आपने अप्लाई की आपको स्क्रीन टाइम एक मंथ में आधा हो जाएगा और आपके पास बाकी चीजों करने का वक्त होगा।
टिप नंबर वन। डू नॉट चार्ज योर फोन नीयर यॉर बैड।

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जी हां, आपको अपना फोन अपने बैड के पास चार्ज नहीं करना है। हो सके तो रात में स्विच ऑफ करके सोएं। आपका फोन आपके हाथ की रेंज से दूर रखा होना चाहिए ताकि ईजिली एक्सेस ना हो। मान लीजिए आपका फोन आपके बैड के किनारे पर लगा हुआ है। आप सोचने लगे आंख बंद कर ली आप लाइट बंद हो गई लेकिन 10 मिनट बाद फोन आपके हाथ में होता है और आप रील देख रहे होते हैं। इसलिए अगली रात में अपने फोन को अपने से दूर रखिए। नींद भी अच्छी आएगी और हेल्थ भी अच्छी होगी।
टिप नंबर टू। चेंज योर मोबाइल फोन सेटिंग।

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अगर आप अपने सोशल मीडिया एडिक्शन को खत्म करना चाहते हैं, तो आपको अपने फोन में कुछ जरूरी बदलाव करने होंगे। सबसे पहले, सारी नोटिफिकेशन ऑफ कर दें, ताकि बार-बार फोन देखने की आदत खत्म हो जाए और आपको बेवजह के डिस्ट्रैक्शन न मिले। दूसरा, डिस्ट्रैक्शन बेस्ड ऐप्स को डिलीट करें। खासतौर पर वे ऐप्स जिनमें बार-बार जाने का मन करता है। अगर आपको उनका इस्तेमाल करना ही है, तो ब्राउजर में करें और हर बार लॉगआउट कर दें, साथ ही पासवर्ड लंबा रखें, ताकि बार-बार लॉगिन करना झंझट लगे।
तीसरा, अपने मोबाइल का पासवर्ड लंबा सेट करें। इससे बार-बार फोन अनलॉक करने की इच्छा कम होगी और आप बिना वजह फोन देखने से बचेंगे। चौथा, काम के दौरान एयरप्लेन मोड का उपयोग करें। इससे फोन की नोटिफिकेशन और कॉल्स से आपका ध्यान नहीं भटकेगा, जिससे आप ज्यादा फोकस होकर अपना काम पूरा कर पाएंगे। और अंत में, अपनी स्क्रीन को ब्लैक एंड व्हाइट मोड में सेट करें। यह आपके फोन को कम आकर्षक बनाएगा, जिससे उसे बार-बार देखने की इच्छा कम होगी।
इन पाँच आसान सेटिंग्स को अपनाकर आप अपनी स्क्रीन टाइम में जबरदस्त गिरावट देखेंगे और सोशल मीडिया की लत से खुद को बचा पाएंगे।
टिप नंबर थ्री। टेक अ सेलफोन हॉलिडे। कोई एक दिन बिना फोन के रहना भी शुरू कर दें। अपने फोन को भी एक दिन की छुट्टी दे देनी चाहिए। हां ये मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं है। ऐसा करने से आपको फोन एडिक्शन कम करने में मदद मिलेगी, लेकिन साथ ही आपकी विल पावर बहुत स्ट्रांग हो जाएगी। आपको लगेगा कि अगर मैं ये कर सकता हूं तो मैं कोई भी कर सकता हूं।
टिप नंबर फोर। चेंज यॉर थिंकिंग।

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हमेशा आप अपने आप को याद दिलाते रहें कि जिस चीज के लिए मैं फोन उठाने जा रहा हूं क्या ये इतना इंपॉर्टेंट है मेरे लिए? और क्या ये काम मैं बाद में भी कर सकता हूं? अगली बार फोन उठाने की जरूरत लगे तो सोचो कि ये कॉल या मैसेज करना जरूरी है। यह काम मैं बाद में भी कर सकता हूं। फोन उठाना अगर बहुत जरूरी नहीं है तो उसको टाल देना ही ज्यादा बेहतर ऑप्शन है।
टिप नंबर फाइव। एंगेज विद अदर एक्टिविटीज।

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अपने बचपन को याद करिए कि कौन सा स्पोर्ट आपको बचपन में खेलने में अच्छा लगता था। अपनी हॉबीज को फिर से जिंदा कीजिए। वहां टाइम स्पेंड कीजिए। फोन आप खुद ब खुद दूर होने लगेगा। जब आप ये टिप्स अप्लाई करेंगे। अपनी जिंदगी में आपको एक बहुत बड़ा चेंज अपनी जिंदगी में देखने को मिलेगा। आपको बहुत ज्यादा समय मिलेगा और चीजें करने के लिए तो आएगा।
तो दोस्तों ये थी हमारी एक इंट्रेस्टिंग वीडियो आशा करता हूं आपको यह वीडियो जरूर पसंद आई होगी इसीलिए प्लीज इसे लाइक करें, हमारे चैनल Fitness Secret को सब्सक्राइब जरूर करें और Visit on Health Darbar
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