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मेडिकल जर्नल JAMA इंटरनेशनल में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, रोज सिर्फ 10 मिनट टहलने से Lifespan यानी जीवन प्रत्याशा कई साल तक बढ़ सकती है। इस स्टडी में पता चला है कि अगर कोई व्यक्ति रोज सिर्फ 10 मिनट ब्रिस्क वॉक (तेज टहलना) करता है तो प्रीमेच्योर मौत का जोखिम 7% तक कम हो सकता है। अगर वॉकिंग टाइम बढ़ाकर 20 मिनट कर दें तो प्रीमेच्योर मौत का जोखिम 13% तक कम हो सकता है। वहीं, इसे बढ़ाकर 30 मिनट कर दिया जाए तो प्रीमेच्योर मौत का जोखिम 17% तक कम हो सकता है। इसका मतलब है कि ब्रिस्क वॉक से प्रीमेच्योर मौत का जोखिम कम हो जाता है और Lifespan बढ़ सकती है।
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की एक स्टडी के मुताबिक, प्रतिदिन सिर्फ 30 मिनट टहलने से दिल की बीमारियों का खतरा 19% तक कम हो सकता है। वहीं, जर्मन हेल्थ इंस्टीट्यूट, रॉबर्ट कोच इंस्टीट्यूट की एक स्टडी के मुताबिक, खाने के बाद 15 मिनट की वॉक से शरीर और दिमाग दोनों दुरुस्त रहते हैं। इससे ब्लड शुगर लेवल भी कंट्रोल में रहता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम कम हो जाता है। कुल मिलाकर, टहलना Lifespan बढ़ाने और सेहतमंद जीवन के लिए बेहद फायदेमंद है।
इसलिए Fitness Secret में आज हम ब्रिस्क वॉक की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- ब्रिस्क वॉक से क्या फायदे होते हैं?
- किन लोगों को ब्रिस्क वॉक से बचना चाहिए?
वॉकिंग के लिए छोटे टारगेट सेट करें

Boost Your Lifespan
इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. दीपक गुप्ता कहते हैं कि जब लोग फिजिकल फिटनेस के लिए प्लान बनाते हैं, तो अक्सर वे बहुत बड़े और मुश्किल टारगेट सेट कर लेते हैं। ऐसे में शुरू में जोश के साथ शुरुआत तो होती है, लेकिन कुछ ही दिनों में इसे फॉलो करना मुश्किल हो जाता है, जिससे वे बीच में ही छोड़ देते हैं। इसलिए, छोटे और व्यावहारिक टारगेट तय करना जरूरी है, ताकि इसे आसानी से अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सके। छोटे-छोटे स्टेप्स से धीरे-धीरे आदत विकसित होगी, जिससे नियमितता बनी रहेगी और फिटनेस गोल्स को हासिल करना आसान होगा।
सिर्फ 10 मिनट टहलना भी फायदेमंद

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डॉ. दीपक गुप्ता के मुताबिक, अगर आप रोज सुबह एक्सरसाइज के लिए आधे घंटे नहीं निकाल सकते हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। पूरे दिन में सिर्फ 10-15 मिनट की ब्रिस्क वॉक भी बहुत फायदेमंद है। इससे पाचन तंत्र में सुधार हो सकता है, मोटापा कम हो सकता है। इससे और क्या फायदे होते हैं
- मेटाबॉलिज्म तेज होता है।
- मोटापा कम होता है।
- पाचन बेहतर होता है।
- इंसुलिन रेजिस्टेंस कम होता है।
- मूड बेहतर होता है।
- कॉग्निटिव हेल्थ सुधरती है।
- नींद अच्छी आती है।
हार्ट और ब्रेन हेल्थ में होता सुधार

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रोज कुछ मिनट की ब्रिस्क वॉक से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जिससे ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। जब ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर संतुलित रहते हैं, तो हार्ट हेल्थ में भी सुधार होता है, जिससे हृदय रोगों का जोखिम कम हो जाता है। इसके अलावा, नियमित तेज़ टहलने से इंफ्लेमेशन (सूजन) कम होती है, जिससे शरीर की मेटाबॉलिक फंक्शनिंग बेहतर होती है और डायबिटीज जैसी बीमारियों का खतरा घटता है।
ब्रिस्क वॉक सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि दिमाग के लिए भी फायदेमंद होती है। यह मस्तिष्क के रक्त संचार को बढ़ाती है, जिससे ब्रेन फंक्शनिंग में सुधार होता है और मानसिक सतर्कता बनी रहती है। साथ ही, यह तनाव कम करने में भी सहायक होती है, जिससे संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर होता है। नियमित वॉक करने से शरीर और दिमाग दोनों मजबूत बनते हैं, जिससे जीवनशैली स्वस्थ और सक्रिय बनी रहती है।
बिजी लाइफस्टाइल से कुछ मिनट चुराए

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आजकल लोगों की जिंदगी इतनी व्यस्त है कि अपनी सेहत के लिए कुछ मिनट निकालना भी मुश्किल हो गया है। हालांकि, डॉ. दीपक गुप्ता कहते हैं कि अगर हम थोड़े एफर्ट्स करें तो अपने लिए कुछ मिनट निकालकर वॉक तो कर ही सकते हैं। इसमें कोई मेहनत नहीं लगती है और खर्च भी नहीं आता है।
ऐसे करें कुछ मिनट एक्स्ट्रा वॉक
- फोन पर बात करते हुए बैठने की बजाय टहलें ।
- एलिवेटर या लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों से चढ़ें।
- हर एक घंटे में कुछ मिनट वॉक के लिए सीट से उठें।
- गाड़ी कुछ दूर पार्क करें ताकि थोड़ा पैदल चल सकें।
- भोजन के बाद कुछ देर पैदल जरूर चलें।
ब्रिस्क वॉक पर कुछ कॉमन सवाल और जवाब
सवाल: ब्रिस्क वॉक कितनी तेज होनी चाहिए?
जवाब: आमतौर पर 1 घंटे में 5-6 किलोमीटर की रफ्तार से चलना ब्रिस्क वॉक माना जाता है। इसे ऐसे समझिए कि अगर आप प्रति मिनट करीब 100 कदम चल रहे हैं तो ब्रिस्क वॉक के लिए आपकी स्पीड सही है।
सवाल: रोज कितनी देर ब्रिस्क वॉक करनी चाहिए?
जवाब: अच्छे स्वास्थ्य के लिए हफ्ते में कम-से-कम 120 मिनट ब्रिस्क वॉक करनी चाहिए। इसका मतलब है कि हफ्ते में कम-से-कम 5 दिन नियमित रूप से 24-25 मिनट ब्रिस्क वॉक करनी चाहिए। अगर वजन कम करना चाहते हैं तो आप थोड़े एक्स्ट्रा एफर्ट्स दे सकते हैं यानी पूरे दिन में 30-35 मिनट तक ब्रिस्क वॉक कर सकते हैं। अगर हेल्दी डाइट लें तो वजन कम करने में आसानी होगी। आपके पास समय नहीं है तो 10-15 की ब्रिस्क वॉक भी काफी है।
सवाल: ब्रिस्क वॉक सामान्य वॉक की अपेक्षा ज्यादा फायदेमंद क्यों है?
जवाब: सामान्य वॉक का मतलब है कि आप बिना किसी एफर्ट के आराम से चल रहे हैं। जबकि ब्रिस्क वॉक थोड़ी तेज होती है, इस दौरान लगभग पूरा शरीर हरकत में होता है। इससे हल्का पसीना आता है और दिल की धड़कन भी बढ़ती है। यह हार्ट बीट रेगुलेशन में भी मदद करता है।
सवाल: क्या ब्रिस्क वॉक से घुटनों में दर्द बढ़ सकता है?
जवाब: अगर टहलने की जगह ऊबड़-खाबड़ नहीं है और आपके घुटनों में पहले से कोई समस्या नहीं है तो कोई दिक्कत नहीं होती है। आमतौर पर घुटनों की समस्या में भी इससे राहत मिलती है। इसके बावजूद अगर घुटनों में दर्द है तो ब्रिस्क वॉक से पहले डॉक्टर से सलाह जरूरी है।
सवाल: ब्रिस्क वॉक का सही तरीका क्या है?
जवाब:
- इस दौरान शरीर सीधा रखें और झुककर न चलें।
- पूरी वॉक के दौरान कदमों की रफ्तार एक समान रखें।
- बहुत लंबे स्ट्राइड न लें यानी बहुत लंबे डग न रखें।
- इस दौरान हाथों का मूवमेंट जरूरी है, इससे स्पीड और बैलेंस बना रहता है।
- गहरी सांस लें और इस दौरान नाक से सांस लेने की कोशिश करें।
सवाल: क्या ब्रिस्क वॉक जिम का विकल्प हो सकती है?
जवाब: हां, बिल्कुल हो सकती है। अगर कोई हैवी एक्सरसाइज नहीं करना चाहता है तो ब्रिस्क वॉक एक अच्छा विकल्प हो सकती है। यह एक अच्छी कार्डियो एक्सरसाइज है और इससे फिजिकल फिटनेस भी बनी रहती है।
सवाल: ब्रिस्क वॉक के लिए सही समय क्या है, सुबह या शाम?
जवाब: इसके लिए तो दिन में कोई भी समय सही है। हालांकि, सुबह ताजी हवा और कम प्रदूषण के कारण मॉर्निंग ब्रिस्क वॉक ज्यादा फायदेमंद है। अगर सुबह समय नहीं मिलता है तो शाम को भी वॉक पर जा सकते हैं।
सवाल: किन लोगों को ब्रिस्क वॉक से बचना चाहिए?
जवाब: ब्रिस्क वॉक ज्यादातर लोगों के लिए फायदेमंद होती है। हालांकि, कुछ खास कंडीशन में इससे बचना चाहिए या डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए। इन सभी लोगों को डॉक्टर की सलाह के बाद ही ब्रिस्क वॉक करनी चाहिए-
- जिन लोगों को गंभीर हार्ट डिजीज है।
- जिन्हें जोड़ों और घुटनों में गंभीर दर्द रहता है।
- जिनका ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा रहता है।
- जिनकी हाल ही में कोई सर्जरी हुई है।
- जिन्हें अस्थमा या क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) है।
- जिनका शुगर लेवल बहुत कम या ज्यादा रहता है
- जिन प्रेग्नेंट महिलाओं को कोई कॉम्प्लिकेशन है।
- जिन्हें कोई गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या है।
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