7 Proven Science of Weight Loss | हमारा वजन क्यों बढ़ता है ?

वर्कआउट, डाइटिंग या डिटॉक्स। जब भी वजन घटाने (Weight Loss) की बात आती है तो हर व्यक्ति हमें यही सलाह देता है कि थोड़ा बहुत खाने-पीने पर कंट्रोल करने लग जाओ, डाइट करो। रोजाना रनिंग या वर्कआउट करो या फिर नींबू, जीरे वगैरह जैसे तरह-तरह के डिटॉक्स ट्राई करो। लेकिन आज मैं आपको बताना चाहता हूं कि Weight Loss करने के लिए यह सब करने से पहले एक सबसे इंपॉर्टेंट चीज करना बेहद जरूरी होता है। ये वो तरीका है जिससे आज पूरी दुनिया में हजारों लोग सिर्फ 1 से 2 महीने में ही कई किलो वजन घटाने में सफल हो रहे हैं।

क्या हम सब नहीं जानते कि अगर हम अपने खाने-पीने को कंट्रोल करने लगे या डेली बहुत ज्यादा कैलोरीज बर्न करने लगे तो वजन भी धीरे-धीरे कम होने ही लगेगा? सिर्फ आप ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया इस बात को बहुत अच्छी तरह से जानती है। लेकिन बावजूद इसके आज दुनिया भर की पॉपुलेशन में से लगभग 40% लोग ओवरवेट हैं और हर साल ओबेसिटी की वजह से लगभग 45 लाख लोगों की समय से पहले मौत हो जाती है। अब सवाल ये उठता है कि ऐसा क्यों हो रहा है? सब कुछ कर लेने के बाद भी Weight Loss करने में ज्यादातर लोग फेल क्यों हो रहे हैं?

वजन घटाने के बारे में सारी जानकारी होने के बावजूद भी हम धीरे-धीरे वेट गेन ही करते जा रहे हैं। इसके जवाब में कोई भी व्यक्ति आपको यह जरूर कहेगा कि शायद तुम Weight Loss करने में अपना 100% नहीं दे रहे, और हो सकता है जब आप ये बात सुनें तो आपको भी यही लगे। क्योंकि ज्यादातर लोगों का वजन घटाने का सफर काफी मिलता-जुलता होता है। हम रनिंग, जिम, योगा और दूसरे वर्कआउट वगैरह शुरू तो कर देते हैं लेकिन फिर थोड़े ही दिन बाद उतने कंसिस्टेंट और रेगुलर नहीं रह पाते।

ऐसा ही डाइट के साथ भी होता है। डाइट वाली चीजों से हमारा पेट और मन दोनों ही नहीं भरता। लाख कोशिश करने के बाद भी दिमाग में हमारे फेवरेट खाने की चीज से जुड़े खयाल आते ही रहते हैं। पेट पूरा भरकर न खाने पर संतुष्टि नहीं मिलती और बार-बार कुछ खाते रहने का मन करता ही रहता है। ऐसे में व्यक्ति सोचता है कि कोई ऐसा नुस्खा मिल जाए जो तुरंत ही कुछ किलो Weight Loss कर दे। तो फिर वो वेट लॉस ड्रिंक, वेट लॉस पाउडर, चूर्ण, गरम पानी और नींबू पानी वगैरह जैसे बॉडी डिटॉक्स ट्राई करता है। लेकिन फिर थोड़े ही दिन बाद रियलाइज होता है कि इनका भी हमारी बॉडी पर कोई खास असर नहीं हो रहा।

इस सबके बाद व्यक्ति दो तरह की मेंटालिटी का शिकार हो जाता है। पहला, कि शायद उसमें कोई कमी है। वजन घटाने के लिए जितनी लगन, डिसिप्लिन और जितनी मेहनत की जरूरत है, शायद वो अपने आलस, आदतों पर कंट्रोल न होने या जोश की कमी के चलते नहीं कर पा रहा। और दूसरा, कि वो अपने मोटापे और उससे जुड़ी प्रॉब्लम्स को ही अपना लेता है—”मुझसे खाने-पीने पर कंट्रोल नहीं होता, एक न एक दिन तो सबको ही मरना है, तो क्यों न खूब खा-पीकर मरा जाए?”

अगर आप भी कहीं ना कहीं इन दोनों या किसी एक बात से थोड़ा भी रिलेट करते हैं या फिर आपको लगता है कि मैंने सब कुछ ट्राई कर लिया लेकिन किसी भी तरीके से मेरा Weight Loss नहीं हो रहा, तो वीडियो में आने वाली आगे की जानकारी को ध्यान से सुनना।

वजन बढ़ने के कारण और वेट लॉस के छिपे फैक्टर्स

  • वजन बढ़ना सिर्फ ज्यादा खाने या कम एक्सरसाइज से नहीं होता, कई अन्य फैक्टर्स भी जिम्मेदार हैं।
  • चार मुख्य एलिमेंट्स हमारी भूख, जंक फूड की क्रेविंग, आलस और वर्कआउट की कमी को प्रभावित करते हैं।
  • हार्मोन्स और न्यूरोट्रांसमीटर हमें बार-बार खाने के लिए मजबूर करते हैं, खासकर अनहेल्दी फूड।
  • डाइट और वर्कआउट के बावजूद रिजल्ट न मिलना कुछ इंटरनल प्रोसेसेस की वजह से हो सकता है।
  • बिना सख्त डाइट और वर्कआउट के भी वजन कंट्रोल किया जा सकता है अगर सही स्ट्रैटेजी अपनाई जाए।
  • टेस्टी फूड खाते हुए भी वेट गेन को रोका जा सकता है बैलेंस और सही अप्रोच से।
  • बॉडी को समझना जरूरी है ताकि वेट लॉस आसान और लंबे समय तक मेनटेन किया जा सके।

वजन बढ़ाने में जेनेटिक्स की भूमिका

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हमारे जीन्स शरीर की कई विशेषताओं के साथ-साथ खाने की आदतों को भी प्रभावित करते हैं। ये हमारी भूख, खाने की क्रेविंग और पसंद पर असर डाल सकते हैं। कई बार हमें ज्यादा भूख नहीं होती, फिर भी टेस्टी फूड देखकर खाने का मन करता है, जो हमारे जीन्स की वजह से होता है। कुछ विशेष जीन्स खाने के प्रति अट्रैक्शन को बढ़ाते हैं, जिससे बार-बार खाने की इच्छा होती है। अगर आपको फूड ब्लॉग, कुकिंग वीडियोज या इंस्टाग्राम पर फूड कंटेंट ज्यादा पसंद आता है, तो हो सकता है कि आपके जीन्स भी इस आदत को बढ़ावा दे रहे हों।

खाने की आदतों पर असर डालने वाले दो मुख्य जीन्स

एफटीओ जीन – यह सीधे मोटापे से जुड़ा होता है। जिन लोगों में इसकी मात्रा अधिक होती है, उनका वजन आमतौर पर ज्यादा होता है।

एमसी4आर जीन – यह हमें तली-भुनी और हाई-फैट फूड की क्रेविंग बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होता है, जिससे हम बार-बार और ज्यादा खाते हैं।

आज के समय में अनहेल्दी फूड हर जगह उपलब्ध है, जिससे ये जीन्स और ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं। पहले के मुकाबले अब जंक फूड तक पहुंच आसान हो गई है, इसलिए हम बेवजह खाने की आदत का शिकार हो जाते हैं। घर से बाहर निकलते ही फूड स्टॉल, रेस्टोरेंट और ठेले हमारी नजरों को आकर्षित करते हैं, जिससे वजन बढ़ना और भी आसान हो जाता है।

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इंटरमीडिएट फास्टिंग: वेट लॉस का इफेक्टिव तरीका

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हम अपने जींस को बदल नहीं सकते, लेकिन उन्हें ट्रैक कर कंट्रोल कर सकते हैं। इंटरमीडिएट फास्टिंग वेट लॉस का एक बेहतरीन तरीका है, जिसमें आपको न तो दिनभर भूखा रहना है और न ही रोज फास्टिंग करनी है।

इंटरमीडिएट फास्टिंग कैसे काम करती है?

  • हमारी बॉडी फैट स्टोर करती है, जैसे कार में पेट्रोल स्टोर होता है।
  • गलत आदतों के कारण हम जरूरत से ज्यादा फैट जमा कर लेते हैं।
  • जब हम एक दिन फैट वाली चीजें छोड़ देते हैं, तो बॉडी जमा फैट को एनर्जी के लिए बर्न करने लगती है।
  • इस दौरान कीटोन केमिकल रिलीज होता है, जो भूख को कम करता है और मेटाबॉलिज्म सुधारता है।

कैसे शुरू करें?

  1. हफ्ते में 1 दिन कम खाएं, फल और सलाद लें।
  2. इसे पूरे दिन करें, फैट और मीठे से बचें।
  3. हफ्ते में 2 दिन फास्टिंग करें।
  4. इसे अपनी सुविधा के अनुसार बढ़ाएं।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • फास्टिंग के अगले दिन ओवरईटिंग न करें।
  • जब फास्ट न हो, तब भी हेल्दी डाइट अपनाएं।
  • धीरे-धीरे खाने की लत और भूख कंट्रोल में आने लगेगी, जिससे वेट लॉस आसान होगा।

हार्मोन्स और वेट गेन: छुपा हुआ कारण

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हमारा वेट सिर्फ खाने-पीने की आदतों पर ही नहीं, बल्कि हार्मोन्स पर भी निर्भर करता है। पेट कितना भरा हुआ महसूस होता है, यह इस बात से तय नहीं होता कि हमने कितना खाया, बल्कि इस पर भी निर्भर करता है कि हमारे हार्मोन्स कैसे काम कर रहे हैं।

भूख और हार्मोन्स का संबंध

  • कुछ लोग दिन में तीन मील (ब्रेकफास्ट, लंच, डिनर) लेते हैं, तो कुछ सिर्फ दो मील।
  • दो मील के बीच में भी हल्की भूख महसूस होती है, जिससे लोग स्नैक्स या जंक फूड खाते हैं।
  • यह भूख हमेशा असली नहीं होती, बल्कि गट हार्मोन्स की कमी के कारण भी हो सकती है।

गट हार्मोन्स की भूमिका

  • जब हम खाना खाते हैं, तो डाइजेशन के दौरान गट हार्मोन्स रिलीज होते हैं।
  • ये हार्मोन्स खून के जरिए दिमाग तक सिग्नल भेजते हैं, जिससे हमें पता चलता है कि पेट भर चुका है।
  • अगर गट हार्मोन्स की कमी हो, तो खाना खाने के बाद भी जल्दी भूख लगने लगती है।

समय से पहले भूख लगना क्यों खतरनाक है?

  • गट हार्मोन की कमी से दिनभर स्नैक्स खाने की आदत बन जाती है।
  • शाम के समय बार-बार जंक फूड खाने की क्रेविंग होती है।
  • तेज भूख के कारण लोग जरूरत से ज्यादा खाना खा लेते हैं, जिससे वेट तेजी से बढ़ता है।

क्या करें?

  • फाइबर और प्रोटीन युक्त भोजन लें, जिससे गट हार्मोन्स सही मात्रा में बनें।
  • इंटरमीडिएट फास्टिंग अपनाएं, ताकि हार्मोन्स बैलेंस रहें।
  • इमोशनल ईटिंग से बचें, हर बार भूख महसूस होने पर तुरंत न खाएं।
  • धीरे-धीरे खाने की आदतों को सुधारें, जिससे हार्मोनल बैलेंस बना रहे और वेट कंट्रोल में रहे।

गट हार्मोन्स और ओवरईटिंग: समस्या और समाधान

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कुछ लोग महसूस करते हैं कि खाना खाने के बाद भी पेट पूरा भरा नहीं लगता और जल्दी फिर से भूख लग जाती है। इस समस्या से बचने के लिए वे एक ही बार में बहुत ज्यादा खाना शुरू कर देते हैं, ताकि पेट पूरी तरह भरा महसूस हो और बार-बार खाने की जरूरत न पड़े। जब गट हार्मोन्स सही से काम नहीं करते, तो व्यक्ति को बार-बार भूख लगती है और ज्यादा खाने की आदत बन जाती है, क्योंकि दिमाग को सही सिग्नल नहीं मिलता कि पेट भर चुका है। धीरे-धीरे ओवरईटिंग नॉर्मल लगने लगती है, जिससे वजन तेजी से बढ़ता है। अच्छी खबर यह है कि जींस को बदलना असंभव है, लेकिन गट हार्मोन्स को बैलेंस किया जा सकता है। इसके लिए सही डाइट को प्राथमिकता देना जरूरी है। गट हार्मोन्स सुधारने के लिए फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट युक्त भोजन को अपनी डाइट में शामिल करें। ओवरईटिंग से बचने और बार-बार भूख लगने की समस्या को दूर करने के लिए गट हार्मोन्स बैलेंस करना जरूरी है, जिसे सही खानपान और हेल्दी लाइफस्टाइल से हासिल किया जा सकता है।

हाई फाइबर फूड से करें गट हार्मोन रीसेट

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हाई फाइबर फूड गट हार्मोन्स को बूस्ट करने में अहम भूमिका निभाता है। फाइबर युक्त भोजन को डाइजेस्ट होने में अधिक समय लगता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। गट हार्मोन्स मुख्य रूप से आंतों में पाए जाते हैं, जहां डाइजेशन और न्यूट्रिशन एब्जॉर्प्शन की प्रक्रिया होती है। जब हम लो फाइबर फूड खाते हैं, तो उसका अधिकतर पाचन पेट में ही हो जाता है, जिससे आंतों पर अधिक काम नहीं आता और गट हार्मोन का प्रोडक्शन सीमित हो जाता है। वहीं, हाई फाइबर फूड धीरे-धीरे ब्रेकडाउन होता है और लंबे समय तक पेट और आंतों में बना रहता है, जिससे गट हार्मोन्स का उत्पादन बढ़ता है। इसके अलावा, हाई फाइबर फूड के पाचन के दौरान शॉर्ट चेन फैटी एसिड का निर्माण होता है, जो गट हार्मोन्स को सक्रिय करते हैं और भूख को नियंत्रित रखते हैं। डाइट में फाइबर की मात्रा बढ़ाने के लिए बीन्स, स्प्राउट्स, बीज वाले अनाज, दालें, फल और हरी सब्जियों को शामिल करें। ये न केवल पाचन को बेहतर बनाते हैं बल्कि लंबे समय तक भूख भी नहीं लगने देते, जिससे अनहेल्दी स्नैकिंग से बचाव होता है।


लेटेस्ट साइंस के मुताबिक इसमें सारी गलती हमारी नहीं कि हम मोटे हैं। हमने अभी तक वजन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार दो सबसे बड़े कारण जानें। हमारे पूर्वजों से मिले जीन और पाचन तंत्र में पाए जाने वाले हार्मोन्स। इन दोनों के अलावा ऐसे दो और बड़े कारण हैं जो पूरी तरह साइकोलॉजिकल है, जो कि दिमागी तौर पर हमें खाने के लिए मजबूर कर देते हैं। हम कितनी भी कोशिश कर लें, आखिर में हम वजन कम करने में फेल ही हो जाते हैं क्योंकि हमारे दिमाग के अंदर किसी प्रोग्राम की तरह फिट होते हैं। ये दोनों ही रीजन कौन से हैं और इनसे छुटकारा पाकर तेजी से वजन कैसे घटाया जा सकता है इसके बारे में हम इस टॉपिक पर आने वाले अगले वीडियो में बात करेंगे।

तो दोस्तों ये थी हमारी एक इंट्रेस्टिंग वीडियो आशा करता हूं आपको यह वीडियो जरूर पसंद आई होगी इसीलिए प्लीज इसे लाइक करें, हमारे चैनल Fitness Secret को सब्सक्राइब जरूर करें और Visit on Health Darbar

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