5 Best Way to Sleep for Ultimate Rest | शायद आप रोज गलत तरीके से सोते है

जब कोई व्यक्ति योगा या जिम में एक्सरसाइज करता है तो उस समय बॉडी के पोश्चर और वर्कआउट फॉर्मेशन पर बहुत ध्यान दिया जाता है क्योंकि गलत तरीके से की गई एक्सरसाइज व्यक्ति को इंजर्ड भी कर सकती है। ठीक इसी तरह हमारे सोने की पोजिशन का भी हमारी सेहत पर अच्छा और बुरा दोनों तरह से असर पड़ता है, खासकर हमारे पाचनतंत्र, दिमाग और आराम (rest) पर। सभी जानते हैं कि अच्छी नींद के बाद हम ज्यादा एनर्जेटिक महसूस करते हैं, पर एक गहरी नींद से दिन भर की थकान पूरी तरह खत्म हो जाती है। लेकिन जितनी ज्यादा जरूरी एक गहरी और लंबी नींद होती है, उतनी ही इम्पॉर्टेंट हमारी सोने की पोजिशन भी मानी जाती है, ताकि हमें पूरा आराम (rest) मिल सके।


आज 70% से भी ज्यादा लोग सोने के सही तरीके से पूरी तरह अनजान हैं। गलत तरह से सोने पर कई लोगों को रात में ठीक तरह से नींद नहीं आती या तो रात में बार बार नींद खुलती रहती है या फिर सोते समय नींद लगने में काफी समय लग जाता है। इसके अलावा अचानक गर्दन, कमर, कंधे में दर्द शुरू होना, पाचन की गड़बड़ी, दिनभर आलस आना, सुबह पेट ठीक तरह से साफ न होने के साथ साथ बॉडी का ब्लड प्रेशर और यहां तक कि हमारे दिल की सेहत पर भी हमारे सोने के तरीके का काफ़ी असर पड़ता है। पर आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारी त्वचा की सेहत और बालों की क्वॉलिटी भी सिर्फ और सिर्फ हमारे सोने के तरीके से प्रभावित हो सकती है।

सोने की अलग-अलग पोजीशन और उनका असर

कुछ लोग अपने दाएं हाथ की तरफ करवट लेकर सोते हैं, तो कुछ लोग बाएं तरफ। कुछ लोग पीठ के बल सोते हैं, तो कुछ लोग पेट के बल। इन सभी पोजीशन्स का हमारी सेहत पर अलग-अलग असर होता है। पेट के बल सोना सबसे हानिकारक माना जाता है, खासकर स्लीप एपनिया और अस्थमा के मरीजों के लिए। इस पोजीशन में पेट के साथ-साथ हमारे फेफड़ों पर भी दबाव आता है, जिससे सोते समय सांस लेने में मुश्किल हो सकती है। पेट के बल सोने से रीढ़ की हड्डी पर भी जोर पड़ता है, जिससे धीरे-धीरे बैक पेन की समस्या शुरू हो सकती है। इसके अलावा, यह पाचन प्रक्रिया के लिए भी सही नहीं माना जाता।

दाईं करवट लेकर सोना क्यों सही नहीं है?

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राइट साइड यानि दाईं करवट लेकर सोना भी सेहत के लिए सही नहीं माना जाता। हमारे शरीर के पाचन तंत्र को देखें तो हमारा पेट शरीर के बाईं ओर स्थित होता है, और हमारा दिल भी बाईं तरफ मौजूद होता है। दाईं ओर सोने से इसका हमारे डाइजेशन प्रोसेस पर नकारात्मक असर पड़ता है। पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण हमारा पेट अपनी नैचुरल जगह से विपरीत दिशा में दबने लगता है। लंबे समय तक दाईं करवट लेकर सोने से पेट में मौजूद भोजन अपोजिट डायरेक्शन में ट्रैवल करने लगता है, जिससे पाचन प्रक्रिया बाधित हो सकती है। इस कारण से एसिडिटी, खट्टी डकारें, पेट फूलना, ब्लोटिंग, अपचन और कब्ज जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

बाईं तरफ सोने के फायदे

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बाईं तरफ सोने से शरीर में कई सकारात्मक बदलाव आते हैं। यह न केवल पाचन तंत्र को मजबूत करता है बल्कि कई बीमारियों और हेल्थ प्रॉब्लम्स में भी सुधार लाने में मदद करता है। हालांकि, बहुत से लोग इन अद्भुत फायदों से अनजान हैं और गलत पोजीशन में सोना उनकी आदत बन चुका है।

गलत पोजीशन में सोने की आदत कैसे सुधारे?

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गलत सोने की पोजीशन को सुधारने के लिए सबसे पहले अपनी नींद की आदतों को मॉनिटर करें। तकिए और बेड की सही सेटिंग करें, ताकि शरीर को आरामदायक पोजीशन मिले। अगर आपको दाईं करवट या पेट के बल सोने की आदत है, तो इसे धीरे-धीरे बदलने की कोशिश करें। सही पोजीशन में सोने से न केवल आपकी नींद की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि आपके संपूर्ण स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।

लिम्फैटिक सिस्टम

Lymphatic system

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अधिकतर लोग जानते हैं कि हमारे शरीर में रक्त संचार प्रणाली में दो प्रकार की नसें काम करती हैं—पहली, धमनियां (आर्टरीज), जो लाल रंग की होती हैं और ऑक्सीजनयुक्त रक्त को हृदय से शरीर के विभिन्न भागों तक पहुंचाती हैं; दूसरी, शिराएं (वेन्स), जो त्वचा के नीचे हरे रंग की दिखाई देती हैं और शरीर से अशुद्ध रक्त को वापस हृदय तक ले जाती हैं।

लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इन दोनों के अलावा हमारे शरीर में एक और महत्वपूर्ण प्रणाली मौजूद होती है, जिसे लिम्फैटिक सिस्टम कहा जाता है। इस प्रणाली में रक्त नहीं, बल्कि एक विशेष प्रकार का तरल (लिम्फ) प्रवाहित होता है, जिसकी मात्रा लगभग 17 लीटर तक हो सकती है। यह तरल हमारी धमनियों और शिराओं से रिसकर लिम्फैटिक सिस्टम में प्रवेश करता है और फिर इसे वापस रक्त प्रवाह में मिला दिया जाता है।

यदि लिम्फैटिक सिस्टम सही ढंग से काम न करे, तो शरीर में पानी भरने लगेगा, जिससे पैरों में सूजन आ सकती है। साथ ही, शरीर में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे गंभीर स्थिति में मृत्यु भी हो सकती है।

लिम्फ में पोषक तत्वों के साथ-साथ हानिकारक पदार्थ भी मौजूद होते हैं। लिम्फैटिक नसों के बीच-बीच में छोटे-छोटे गांठनुमा संरचनाएं होती हैं, जिन्हें लिम्फ नोड्स कहा जाता है। इन लिम्फ नोड्स का कार्य शरीर में मौजूद हानिकारक तत्वों और संक्रमण को नष्ट करना होता है, जिससे हम कई प्रकार की बीमारियों, संक्रमणों और त्वचा संबंधी समस्याओं से सुरक्षित रहते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, बाईं करवट लेकर सोने से लिम्फैटिक सिस्टम अधिक सक्रिय रहता है। इससे रक्त में मौजूद विषैले तत्व (टॉक्सिन्स) तेजी से बाहर निकलते हैं, जिससे शरीर का डिटॉक्सिफिकेशन अधिक प्रभावी तरीके से हो पाता है।


लेफ्ट साइड सोने के फायदे

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लेफ्ट साइड सोने से पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है। इस पोजीशन में भोजन आसानी से छोटी आंत से बड़ी आंत में पहुंचता है, जिससे सुबह पेट अच्छी तरह साफ़ होता है। हमारा पेट शरीर के बाईं तरफ स्थित होता है, जिससे लेफ्ट साइड सोने पर भोजन में डाइजेस्टिव जूस सही तरीके से मिलते हैं। इससे पाचन प्रक्रिया आसान हो जाती है और पैनक्रियाज को भी अपना कार्य करने में सहूलियत होती है। राइट साइड सोने से पाचन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह स्थिति ठीक वैसी ही होती है जैसे किसी व्यक्ति को उल्टा सिर के बल खड़ा कर दिया जाए। इससे भोजन न ही सही तरीके से पच पाता है और न ही आंतों में सुचारू रूप से ट्रेवल कर पाता है। हमारा दिल भी शरीर के बाईं तरफ स्थित होता है, और लेफ्ट साइड सोने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहता है। खासतौर पर दिल से जुड़ी बीमारियों से ग्रस्त लोगों को हमेशा लेफ्ट साइड करवट लेकर ही सोना चाहिए।

प्रेग्नेंसी में लेफ्ट साइड सोने के फायदे

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प्रेग्नेंसी में लेफ्ट साइड करवट लेकर सोने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जिससे मां और शिशु को अधिक ऑक्सीजन और पोषण मिलता है। यह कमर और रीढ़ पर दबाव कम करता है, जिससे दर्द और असहजता में राहत मिलती है। साथ ही, लीवर और किडनी पर पड़ने वाले दबाव को कम करके उनके कार्य को सुचारू रखता है। लेफ्ट साइड सोने से पाचन क्रिया बेहतर होती है और एसिडिटी, छाती में जलन जैसी समस्याओं में आराम मिलता है। इसके अलावा, यह प्लेसेंटा तक अधिक रक्त और पोषण पहुंचाने में मदद करता है, जिससे शिशु का विकास सही तरीके से होता है।

बैकपेन

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जिन लोगों को अक्सर कमर और पीठ में दर्द की प्रॉब्लम होती है, उन्हें ज्यादा से ज्यादा उल्टे हाथ की तरफ करवट लेकर ही सोना चाहिए। लेफ्ट साइड सोने से हमारी रीढ़ की हड्डी पर जोर कम पड़ता है और साथ ही बैक मसल्स भी रिलैक्स होती है।

बाई करवट सोते समय हमारे पाचन के साथ साथ ब्लड प्रेशर और सभी अंदरूनी अंगों तथा दिमाग की कार्यप्रणाली भी अच्छी तरह काम करती है। जिन लोगों की सोते समय सांस फूलने लगती है या जो खर्राटों से परेशान हैं, उन्हें Left Side सोने से इस प्रॉब्लम में फायदा मिलने लगता है।

अगर आप लेफ्ट साइड सोने की आदत डालना चाहते हैं तो कुछ आसान टिप्स मदद कर सकते हैं। सबसे पहले, रात में हैवी भोजन से बचें, क्योंकि ज्यादा खाने से नींद आने में देर होती है और हम सबसे कंफर्टेबल पोजीशन में सोने लगते हैं। राइट साइड में तकिया रखें, जिससे नींद में करवट लेने से बचा जा सके और धीरे-धीरे लेफ्ट साइड सोने की आदत बने। इसके अलावा, राइट साइड में हल्की लाइट जलाने से ब्रेन स्वाभाविक रूप से विपरीत दिशा में करवट लेने को प्रेरित करता है। साथ ही, अपने बेड की पोजीशन बदलकर भी सोने की आदतों में सुधार किया जा सकता है, जिससे लेफ्ट साइड सोने की नई आदत डालना आसान होगा।

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