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दोस्तों, आज के इस वीडियो में हम बात करेंगे एक ऐसे बेहद जरूरी विषय पर, जिसके बारे में ज्यादातर लोग सोचते तक नहीं—stool। क्या आप जानते हैं, आजकल हम जैसा भोजन कर रहे हैं और जिस तरह के वातावरण में रह रहे हैं, उसका सीधा असर हमारे पाचन तंत्र और स्टूल पर पड़ता है? हमारे शरीर में समय के साथ धीरे-धीरे कई तरह की छोटी और बड़ी बीमारियां पनपती रहती हैं, जिनका हमें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में एहसास तक नहीं होता। और फिर अचानक एक दिन यही बीमारियां हमारे चेहरे पर पिंपल, तरह-तरह के त्वचा रोग, बालों और आंखों की कमजोरी, दिल और लिवर से जुड़ी बीमारियां, किडनी में समस्या, हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा, माइग्रेन, दिमाग तथा पेट से जुड़े कई तरह के रोग और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर समस्या के रूप में सामने आ जाती हैं। आपका stool आपके स्वास्थ्य के बारे में बहुत कुछ बताता है—इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है!
बिना डॉक्टर के कैसे जानें अपनी सेहत की स्थिति?

Stool Secrets
कैसा हो अगर हमें अपने शरीर में चल रही हर गतिविधि और अंदरूनी हर छोटी-बड़ी समस्या का बिना किसी डॉक्टर की सहायता लिए ही पता चल जाए? हमारा शरीर किसी भी बीमारी की शुरुआत में ही हमें अलग-अलग तरह से संकेत देने लगता है, और अगर हम इन संकेतों पर ध्यान दें, तो सेहत से जुड़ी किसी भी समस्या को आने से पहले ही रोका जा सकता है। हमारे चेहरे, त्वचा, बाल, आंखें, जीभ, पेशाब, मल और नाखून शरीर के अंदर की गतिविधियों का संकेत देते हैं। इस विषय पर हमने पहले भी बात की थी कि चेहरे पर आने वाले बदलाव शरीर के अंदर मौजूद अंगों की स्थिति को कैसे दर्शाते हैं। अगर आपने वह वीडियो नहीं देखा है, तो उसे जरूर देखें। ठीक उसी तरह, आज के इस वीडियो में हम जानेंगे कि शरीर से निकलने वाला व्यर्थ पदार्थ यानी मल के जरिए शरीर के अंदर हो रही किन-किन गतिविधियों का पता लगाया जा सकता है। सुनने में यह थोड़ा गंदा और अजीब जरूर लग सकता है, लेकिन यकीन मानिए, आज एक साधारण व्यक्ति से लेकर बड़े-बड़े सेलिब्रिटीज और खेल जगत के एथलीट भी खुद को स्वस्थ, सुंदर और फिट रखने के लिए अपने बाउल मूवमेंट, पाचन और मल से जुड़ी गतिविधियों पर खास ध्यान देते हैं।
मल से सेहत का कैसे पता चलता है?

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हमारे शरीर में खून की स्थिति, पेट, किडनी और लिवर के साथ-साथ सभी अंदरूनी अंगों की सेहत का पता मल के जरिए लगाया जा सकता है। इसलिए, जब हम किसी बीमारी के कारण डॉक्टर के पास जाते हैं, तो वह हमारी जीभ, आंख और नब्ज देखने के साथ-साथ मल के बारे में भी सवाल करता है। फ्रेश होने का समय, मल का रंग, आकार और आने का तरीका हमारी सेहत से जुड़ी कई साधारण और गंभीर बीमारियों के संकेत दे सकते हैं।
मल के रंग का महत्व
मल का रंग हमारे स्वास्थ्य के बारे में बहुत कुछ बताता है। आमतौर पर थोड़ा बहुत पीलापन सामान्य माना जाता है, लेकिन जब मल का रंग बहुत ज्यादा पीला हो जाए और उसमें चिकनाहट व तेज दुर्गंध आने लगे, तो यह दर्शाता है कि मल में फैट की मात्रा अधिक है। यह तब होता है जब हमारा पाचन तंत्र भोजन से फैट और जरूरी पोषक तत्वों को सही तरीके से एब्जॉर्ब नहीं कर पाता, जिससे शरीर में धीरे-धीरे पोषक तत्वों की कमी होने लगती है।
इसके अलावा, पीला मल “सीलिएक डिजीज” का भी संकेत हो सकता है। इस बीमारी में आटा, ब्रेड, मैदा और अन्य ग्लूटन-युक्त खाद्य पदार्थ पेट के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं और पाचन तंत्र को काफी तकलीफ देते हैं।
मल का रंग और आकार आपके स्वास्थ्य के बारे में क्या बताते हैं?

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बहुत ज्यादा काला मल आयरन सप्लीमेंट या गहरे रंग की चीजें खाने से हो सकता है, लेकिन यह आंतरिक रक्तस्राव का संकेत भी हो सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सफेद या ग्रे मल लिवर और गॉल ब्लैडर की खराबी को दर्शाता है और पित्ताशय की पथरी या लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। लाल रंग का मल कभी-कभी चुकंदर या टमाटर खाने से हो सकता है, लेकिन यदि यह भोजन से संबंधित न हो तो यह पाइल्स, फिशर, अल्सरेटिव कोलाइटिस या कैंसर का लक्षण भी हो सकता है। अब बात करें मल के आकार की, तो छोटे-छोटे और सख्त टुकड़ों में मल आना कब्ज (कॉन्स्टिपेशन) का संकेत है, जो कम पानी पीने और फाइबर की कमी से होता है। लंबे और गांठदार आकार का मल भी कब्ज का लक्षण हो सकता है, खासकर अगर आपकी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि कम है। केले के आकार का मल, जिसकी सतह पर हल्की दरारें हों, सामान्य और स्वस्थ पाचन का संकेत देता है। जब आहार में पर्याप्त फाइबर और पानी होता है, तो मल स्मूथ और सॉफ्ट रहता है, जिससे पेट पूरी तरह साफ हो जाता है। दूसरी ओर, नरम, गीले और बड़े आकार की बूंदों में निकलने वाला मल हल्के दस्त (डायरिया) का संकेत हो सकता है, जो पाचन की गड़बड़ी या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) जैसी बीमारी से जुड़ा हो सकता है। यदि डायरिया के लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है। बहुत ज्यादा पतला या खिचड़ी जैसा मल भी डायरिया का लक्षण होता है, जिससे शरीर में पानी और मिनरल्स की कमी हो सकती है। इस दौरान पर्याप्त पानी पीना, फलों के रस और सूप का सेवन करना, तथा केला और दही जैसी चीजें खाना फायदेमंद होता है। लेकिन अगर डायरिया दो दिन से ज्यादा बना रहे, तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
जब मल में किसी तरह का भी सॉलिड नहीं होता और वह पूरी तरह तरल के रूप में बाहर आता है तो यह गंभीर दस्त यानी कि सीवियर डायरिया का लक्षण माना जाता है। यह स्थिति सबसे ज्यादा परेशान कर देने वाली होती है और इसके पीछे एक से ज्यादा अलग अलग कारण भी हो सकते हैं, जैसे कि खराब खाने के चलते फूड पॉइजनिंग हो जाना, लैक्टोज इंटॉलरेंस यानी कि दूध से बनी चीजों से एलर्जी होना, किसी तरह का बैक्टीरियल इन्फेक्शन या कोई दवाई का साइड इफेक्ट। इस दौरान कई लोगों को चक्कर, आंखों में धुंधलापन, सरदर्द, नींद आना, मुंह का सूखना या बुखार जैसे लक्षण भी नजर आने लगते हैं। डिहाइड्रेशन से बचने के लिए पानी ज्यादा से ज्यादा पिएं और अगर दो दिन तक ये ठीक न हो तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
तो दोस्तों ये थी हमारी एक इंट्रेस्टिंग वीडियो आशा करता हूं आपको यह वीडियो जरूर पसंद आई होगी इसीलिए प्लीज इसे लाइक करें, हमारे चैनल Fitness Secret को सब्सक्राइब जरूर करें और Visit on Health Darbar
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