Sunita Williams: Battling 7 Side Effects & Emerging Stronger |सुनीता विलियम्स की वापसी कब?

अंतरिक्ष में फंसे एस्ट्रोनॉट Sunita Williams और बुच विल्मोर 9 महीने 13 दिन बाद पृथ्वी पर लौट रहे हैं। उनके साथ क्रू-9 के दो और एस्ट्रोनॉट निक हेग और अलेक्सांद्र गोरबुनोव भी 18 मार्च को रवाना हुए।

ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट का हैच सुबह 08:35 बजे बंद हुआ और 10:35 बजे यह इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से अलग हुआ। यह 19 मार्च को सुबह 3:27 बजे फ्लोरिडा के तट पर लैंड करेगा। नासा के अनुसार, 2:41 बजे डीऑर्बिट बर्न शुरू होगा, जिससे स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करेगा।

सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर 2 जून को एक हफ्ते के मिशन पर गए थे, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण अब तक लौट नहीं सके। लंबे अंतरिक्ष प्रवास से उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है, जिससे DNA क्षति और अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ गया है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वे फरवरी 2025 से पहले नहीं लौट सकेंगे।

बोन और मसल लॉस होता है

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स्पेस में ग्रेविटी धरती की तुलना में लगभग शून्य होती है, लेकिन माइक्रोग्रेविटी में लंबे समय तक रहने से शरीर पर गहरा प्रभाव पड़ता है। खासकर, हड्डियों और मांसपेशियों की घनत्व (डेंसिटी) धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिसे बोन लॉस और मसल एट्रॉफी कहा जाता है।

इस स्थिति में, हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। मांसपेशियों में सिकुड़न और ताकत की कमी के कारण एस्ट्रोनॉट्स को चलने-फिरने और सामान्य गतिविधियाँ करने में कठिनाई हो सकती है। इसके अलावा, शरीर का कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम भी प्रभावित होता है, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण की अनुपस्थिति में हृदय को रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ती, जिससे दिल की मांसपेशियाँ भी कमजोर पड़ सकती हैं।

नासा इस समस्या को कम करने के लिए एस्ट्रोनॉट्स को रोजाना विशेष व्यायाम करने की सलाह देता है, जिससे उनकी हड्डियों और मांसपेशियों की ताकत बनी रहे। इसके बावजूद, लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स को धरती पर लौटने के बाद रीहैबिलिटेशन और रिकवरी की जरूरत होती है।

स्पेस एनीमिया का खतरा

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इतना ही नहीं, स्पेस में लंबे समय तक रहने की वजह से बॉडी के फ्लूड्स में भी बदलाव हो जाता है इसलिए स्पेस में धरती की तुलना से ज्यादा रेड ब्लड सेल्स नष्ट होते हैं। साथ ही, स्पेस रेडिएशन की वजह से होने वाला ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस भी रेड ब्लड सेल्स को नुकसान पहुंचाता है।

आपको बता दें कि नासा के मुताबिक, धरती पर एक व्यक्ति के शरीर में हर सेकंड में लगभग 20 लाख रेड ब्लड सेल्स बनते और नष्ट होते हैं, लेकिन स्पेस में ये संख्या बढ़कर 30 लाख हो जाती है। इसके कारण अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस एनीमिया हो जाता है

कैंसर का जोखिम

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स्पेस की माइक्रोग्रेविटी में दिल भी ठीक तरीके से काम नहीं कर पाता है। इसकी वजह से दिल के ढांचें में भी बदलाव आ जाते हैं। साथ ही, स्पेस के रेडिएशन के एक्सपोजर के कारण कैंसर होने का जोखिम भी बढ़ जाता है। आपको बता दें कि स्पेस से वापस लौटने के बाद कई अंतरिक्ष यात्रियों ने आंखों की रोशनी से जुड़ी परेशानी के बारे में भी बताया है।

डीएनए में असमानता

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एक्सपर्ट के मुताबिक, कॉसमिक रेडिएशन काफी हाई एनर्जी के कणों से बने होते हैं, जिनके संपर्क में आने से डीएनए स्ट्रैंड्स टूट जाते हैं और इनमें बदलाव होने लगता है। इसके कारण जेनेटिक असमानताएं भी हो सकती हैं। ये अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत से जुड़े सबसे गंभीर मुद्दों में से एक है।

हालांकि, नासा रेडिएशन के लेवल पर निगरानी रखता है, लेकिन सुनीता विलियम्स के मामले में ये ज्यादा खतरनाक इसलिए है, क्योंकि उन्हें काफी समय तक इसके संपर्क में रहना पड़ सकता है। इसके कारण उनकी दिमागी सेहत पर भी खराब असर हो सकता है।

गुरुत्वार्षण सबसे बड़ी समस्या

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अंतरिक्ष यात्रा मानव शरीर के लगभग हर हिस्से को प्रभावित करती है और इसका मुख्य कारण गुरुत्वाकर्षण है। पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण ही आपको ज़मीन पर रखता है और चीज़ों को नीचे गिराता है। स्पेस में अंतरिक्ष यात्री धरती पर रहने वाले लोगों की तरह ज़मीन पर नहीं चलते। वे अपने अंतरिक्ष यान के अंदर तैरते रहते हैं। ऐसा चंद्रमा की तरह गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण नहीं है, बल्कि इसलिए है क्योंकि आई.एस.एस. मुक्त रूप से पृथ्वी की ओर गिर रहा है और लगभग उसी गति से पृथ्वी के चारों ओर आगे की ओर बढ़ रहा है, जिसका अर्थ है कि स्टेशन के अंदर अंतरिक्ष यात्री तैर रहे हैं। इसका मजेदार और सकारात्मक अर्थ यह भी है कि अंतरिक्ष यात्री उन वस्तुओं को भी आसानी से ले जाने में सक्षम हैं, जिन्हें हम सामान्यतः बहुत भारी मानते हैं या उठा नहीं सकते।

आंखों की रोशनी, मांसपेशियां और हड्डियों पर बुरा प्रभाव

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बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, स्पेस स्टेशन में किसी यात्री के लंबे समय तक रहने का एक और बड़ा नकारात्मक प्रभाव यह है कि उनकी मांसपेशियों को चीजों को हिलाने या उठाने के लिए बहुत कम काम करना पड़ता है। यूके अंतरिक्ष एजेंसी का कहना है कि ऐसा होना इंसान के लिए बहुत बुरा साबित हो सकता है। लगभग पांच महीने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों की मांसपेशियों का 40% और हड्डियों का 12% हिस्सा खत्म हो सकता है। कनाडियन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित शोध से पता चलता है कि केवल दो सप्ताह के बाद हमारी मांसपेशियों का द्रव्यमान 20% तक कम हो सकता है। हमारी देखने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। कम गुरुत्वाकर्षण के साथ उच्च दबाव के कारण अंतरिक्ष यात्री जब धरती पर वापस लौटते हैं तो उनके देखने की क्षमता भी पहले की तुलना में कम हो जाती है।

अंतरिक्ष में कौन सबसे लंबे समय तक रहा

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नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके सहयोगी बुच विल्मोर, जो जून 2024 में आठ दिवसीय मिशन के लिए अंतरिक्ष में गए थे, तकनीकी समस्याओं के कारण नौ महीने तक अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर रहे। स्पेसएक्स के ड्रैगन अंतरिक्ष यान के माध्यम से 19 मार्च 2025 को उनकी सुरक्षित वापसी हुई।

अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने से हड्डियों की घनत्व में कमी, मांसपेशियों की कमजोरी, दृष्टि समस्याएं, और विकिरण के संपर्क में आने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में रहते हुए नियमित व्यायाम और नासा की विशेष स्वास्थ्य निगरानी के माध्यम से अपनी सेहत का ध्यान रखा। उन्होंने स्वयं कहा कि उनकी तबीयत बिल्कुल ठीक है और चिंता की कोई बात नहीं है। ​

धरती पर लौटने के बाद, सुनीता विलियम्स और उनके सहयोगी को पुनर्वास प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिसमें उनकी मांसपेशियों और हड्डियों की मजबूती को पुनर्स्थापित करने के लिए विशेष व्यायाम शामिल होंगे। नासा की मेडिकल टीम उनकी सेहत की निगरानी करेगी ताकि वे सामान्य जीवन में शीघ्र वापसी कर सकें।​

सुनीता विलियम्स अपनी मानसिक और शारीरिक सेहत का विशेष ध्यान रख रही हैं। नासा से मिली ट्रेनिंग और एक्सरसाइज उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखती हैं, साथ ही उन्हें जरूरत पड़ने पर साइकोलॉजिस्ट से बात करने और परिवार से संपर्क में रहने की सुविधा भी मिलती है। फिजिकल हेल्थ के लिए वे सीमित भोजन आपूर्ति के बावजूद उपलब्ध संसाधनों से संतुलित आहार ले रही हैं, जिसमें ज्यादातर सीरियल्स, पाउडर्ड मिल्क और सूप शामिल हैं। आईएसएस पर उनके यूरिन और पसीने को पीने योग्य पानी में बदला जाता है, जबकि ग्राउंड स्टेशन पर डॉक्टर्स की टीम लगातार उनकी सेहत की निगरानी और मानसिक-भावनात्मक सहयोग प्रदान कर रही है।

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