4 Ultimate : Pure Water with Copper, Glass, Steel, or Clay | किस बर्तन में पानी पीना है सही?

जब भी हम पानी पीने की बात करते हैं तो इसके लिए बहुत ही अलग-अलग तरीके के बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ लोग तांबे के बर्तन में पानी पीना ज्यादा फायदेमंद समझते हैं। कुछ लोग मिट्टी के बर्तन में, कुछ लोग शीशे के बर्तन में और कुछ लोग अभी भी ज्यादातर पानी पीने के लिए स्टील के बर्तन का ही इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या सच में इस बात से कोई फर्क पड़ता है कि आप किस बर्तन में पानी पीते हैं क्योंकि पानी (Water) तो आखिर पानी ही है। किसी भी बर्तन में पियो, क्या फर्क पड़ता है? लेकिन दरअसल फर्क पड़ता है। एक सामान्य व्यक्ति के शरीर में लगभग 70% पानी मौजूद होता है, जिसका मतलब है कि अगर किसी बंदे का वजन 100 किलो है तो उसके शरीर में लगभग 70 किलो सिर्फ और सिर्फ पानी मौजूद है और उसमें से भी ज्यादातर पानी (Water) शरीर के हर अलग-अलग अंगों की कोशिकाओं में पाया जाता है, जो कि पूरे शरीर को तरोताजा रखने का काम करता है। क्योंकि हमारे शरीर का ज्यादातर हिस्सा पानी से बना होता है, इसलिए जो पानी हम पीते हैं, वो शरीर में जाकर एक बहुत ही अहम रोल प्ले करता है। अलग-अलग तरह के बर्तनों में पिया गया पानी का हमारे शरीर पर असर भी अलग-अलग तरह से होता है। क्योंकि पानी की सबसे खास बात ये है कि इसे जिस बर्तन में हम डालते हैं, ये उसके गुण को कुछ न कुछ अपने अंदर सोखने का काम करता है। और इसलिए ये बात बहुत ही मायने रखती है कि पानी पीने के लिए आप किस तरह के बर्तन का इस्तेमाल करते हैं।

जब हम तांबे के बर्तन में पानी (Water) रखते हैं, तो तांबे का गुण पानी में समाहित हो जाता है, जिससे पानी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण आ जाते हैं। वहीं, मिट्टी के बर्तन में रखा पानी ठंडा और ताजगी से भरपूर होता है, और इसके बारे में माना जाता है कि यह शरीर को ठंडक पहुंचाता है। शीशे के बर्तन में रखा पानी ताजगी और शुद्धता का प्रतीक होता है। और स्टील के बर्तन में पानी रखने पर पानी का स्वाद और गुणवत्ता थोड़ा बदल सकता है, क्योंकि स्टील का संपर्क पानी के साथ उसकी कुछ प्राकृतिक विशेषताओं को प्रभावित कर सकता है।

इसलिए, पानी (Water) के बर्तन का चुनाव सिर्फ पानी की शुद्धता से ही नहीं, बल्कि उसके द्वारा शरीर पर किए गए प्रभाव से भी जुड़ा हुआ है।

मिट्टी के बर्तन

clay pot

Ultimate : Pure Water

मिट्टी के बर्तनों की तीन प्रमुख विशेषताएँ हैं, जो उन्हें बेहद उपयोगी बनाती हैं। पहली विशेषता यह है कि मिट्टी में प्राकृतिक रूप से कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, पोटेशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो मटके के पानी में घुलकर शरीर के लिए अत्यधिक लाभकारी होते हैं। यह पानी न केवल शुद्ध होता है, बल्कि शरीर को ताकत और पोषण भी प्रदान करता है। दूसरी विशेषता मटका पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा करने का काम करता है। मटके की खुरदरी सतह और छोटे-छोटे छेद पानी के तापमान को सोखने का काम करते हैं, जिससे पानी ठंडा और ताजगी से भरपूर हो जाता है। यह पानी फ्रिज के पानी से कहीं अधिक सेहतमंद होता है, क्योंकि यह शरीर के लिए आदर्श तापमान पर होता है। तीसरी विशेषता यह है कि मटका पानी शरीर में एसिड की मात्रा को संतुलित करता है, जिससे पाचन तंत्र बेहतर काम करता है और शरीर का संतुलन बना रहता है।

हालाँकि, मटका खरीदते समय यह अत्यंत आवश्यक है कि आप उच्च गुणवत्ता की मिट्टी से बने मटके का चयन करें। क्योंकि अगर मटके में सस्ती या गलत मिट्टी का उपयोग किया गया हो, तो इसके पोषक तत्वों का लाभ नहीं मिल पाता, और उलटे शरीर को नुकसान भी हो सकता है। इसलिए मटका खरीदने से पहले यह सुनिश्चित करें कि वह प्रामाणिक और अच्छी मिट्टी से बना हो।


दूसरी गलती जो मटके की साफ सफाई में की जाती है। आपको मटके को हर दिन अंदर से साफ करके पीने का पानी भी हर रोज बदलते रहना चाहिए। तीसरी गलती मटके से हाथ डुबोकर आपको पानी कभी भी नहीं निकालना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से हाथ की गंदगी और बैक्टीरिया पानी को दूषित कर सकते हैं। इसलिए या तो ऐसा मटका आपको खरीदना चाहिए जिसमें पहले से नल लगा हो या नहीं तो मटके से पानी निकालने के लिए हैंडल वाले गिलास का इस्तेमाल करना चाहिए।

तांबे का बर्तन

Ultimate : Pure Water

तांबे के बर्तन में पानी पीने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, ब्रेन फंक्शन में सुधार होता है, और बैक्टीरिया को मारने में मदद मिलती है। तांबा पानी में घुलकर शरीर में कई फायदे पहुंचाता है, खासकर पाचन को बेहतर बनाता है। हालांकि, कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। तांबे के बर्तन में हमेशा ठंडा पानी रखें, क्योंकि गर्म पानी से तांबा ज्यादा घुल सकता है, जो पेट दर्द और अन्य समस्याएं पैदा कर सकता है। एसिडिक चीजों जैसे नींबू और एप्पल साइडर विनेगर से तांबा रिएक्ट करता है, जिससे समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए केवल सादा पानी पिएं। तांबे के बर्तन को कभी फ्रिज में न रखें, क्योंकि इससे वह क्रैक हो सकता है। पानी को 8-12 घंटे तक तांबे के बर्तन में छोड़ें और सुबह खाली पेट पिएं। इसे शीशे या तांबे के गिलास से पिएं, स्टील के गिलास से बचें। लंबे समय तक तांबे का पानी न पिएं, क्योंकि इससे तांबे की मात्रा शरीर में अधिक हो सकती है, जो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है। तांबे के बर्तन को रोज़ नींबू और नमक से साफ करें, और तांबे के जग का इस्तेमाल करें ताकि सफाई आसान हो।

स्टील और शीशे के बर्तन

Ultimate : Pure Water

स्टील और शीशे के बर्तन पानी के लिए न्यूट्रल होते हैं, जो पानी में जल्दी नहीं घुलते। इसका मतलब यह है कि इन बर्तनों में पानी डाले जाने पर, पानी की प्राकृतिक स्थिति में कोई बदलाव नहीं होता। न तो इन बर्तनों में कोई रासायनिक प्रतिक्रिया होती है और न ही पानी में कोई तत्व घुलता है। इसका लाभ यह है कि इन बर्तनों में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित रहता है, क्योंकि पानी में कोई अवांछनीय तत्व नहीं मिलते। यह बर्तन गर्म पानी को भी बिना कोई असर डाले आसानी से सहन कर सकते हैं, जिससे इन्हें गर्म पानी पीने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

अब अगर हम तांबे के बर्तन की बात करें, तो इसे स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से शरीर में आयरन, कैल्शियम, और अन्य खनिज तत्वों का संतुलन सही रहता है। तांबा बैक्टीरिया को मारने का काम करता है और पानी को शुद्ध करता है। सुबह खाली पेट तांबे के बर्तन का पानी पीना खासतौर से फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह पाचन क्रिया को सही करता है, शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है और रक्तसंचार को बेहतर बनाता है।

गर्मी के मौसम में, मिट्टी के मटके का पानी सबसे बेहतर होता है। मिट्टी के बर्तन की खासियत यह है कि यह पानी को नैचुरल तरीके से ठंडा रखता है। मिट्टी में एक खास प्रकार की झिल्ली होती है, जो पानी को आंतरिक रूप से ठंडा करने का काम करती है। गर्मियों में, यह पानी को ताजगी प्रदान करता है और शरीर को हाइड्रेटेड रखता है। मिट्टी के बर्तन का पानी पीने से न केवल शरीर को ठंडक मिलती है, बल्कि यह पाचन तंत्र को भी अच्छा बनाए रखता है।

इसके अलावा, स्टेनलेस स्टील और शीशे के बर्तन भी पानी पीने के लिए अच्छे विकल्प हैं, खासकर जब इनका इस्तेमाल किया जाता है। स्टेनलेस स्टील टिकाऊ होता है और इसे सफाई करना भी आसान होता है, जबकि शीशे के बर्तन पानी को शुद्ध और पारदर्शी रखते हैं। इन बर्तनों में पानी का स्वाद भी प्राकृतिक रूप से बना रहता है क्योंकि इनमें रासायनिक प्रतिक्रियाएं कम होती हैं।

अगर आप जानना चाहते हैं कि पानी कब, कैसे और कितना पीना चाहिए, तो यह जानना महत्वपूर्ण है कि दिनभर में पानी की सही मात्रा शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए आवश्यक होती है। ज्यादा पानी पीने से भी शरीर में अनावश्यक लोड पड़ सकता है, जबकि कम पानी पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन हो सकता है। इस पर गहराई से जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारे चैनल पर मौजूद इस वीडियो को जरूर देखें।

तो दोस्तों ये थी हमारी एक इंट्रेस्टिंग वीडियो आशा करता हूं आपको यह वीडियो जरूर पसंद आई होगी इसीलिए प्लीज इसे लाइक करें, हमारे चैनल Fitness Secret को सब्सक्राइब जरूर करें और Visit on Health Darbar

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